Author: sw_admin

  • ਸਮਾਜ ਸੇਵੀ ਸੰਸਥਾ ਨੇ ਹੋਣਹਾਰ ਵਿਦਿਆਰਥਣ ਤੇ ਜ਼ਰੂਰਤਮੰਦ ਦੀ ਕੀਤੀ ਮਦਦ ਫਤਹਿਗੜ੍ਹ ਸਾਹਿਬ

    ਸਮਾਜ ਸੇਵੀ ਸੰਸਥਾ ਨੇ ਹੋਣਹਾਰ ਵਿਦਿਆਰਥਣ ਤੇ ਜ਼ਰੂਰਤਮੰਦ ਦੀ ਕੀਤੀ ਮਦਦ ਫਤਹਿਗੜ੍ਹ ਸਾਹਿਬ

    ੧੯ ਜੁਲਾਈ (ਹਰਪਾਲ ਸਿੰਘ ਸਲਾਣਾ/ ਬਲਜਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਪਨਾਗ) ਸਰਬ ਹਿਊਮੈਨਿਟੀ ਸਰਬ ਗੋਂਡ ਸਮਾਜ ਸੇਵੀ ਸੰਸਥਾ ਖਰੜ ਵੱਲੋਂ ਪਿੰਡ ਭੁੱਲਮਾਜਰਾ ਦੀ ਹੋਣਹਾਰ ਵਿਦਿਆਰਥਣ ਰਮਨਦੀਪ ਕੌਰ ਨੂੰ ੧੨ ਵੀਂ ਜਮਾਤ ਦੀ ਪੜ੍ਹਾਈ ਲਈ ੧੦ ਹਜ਼ਾਰ ਰੁਪਏ ਦੀ ਮਦ ਅਤੇ ਮੋਬਾਈਲ ਫ਼ੋਨ ਦਿੱਤਾ ਤਾਂ ਕਿ ਵਿਦਿਆਰਥਣ ਆਪਣੀ ਅਗੇਰਲੀ ਪੜ੍ਹਾਈ ਜਾਰੀ ਰੱਖ ਸਕੇ ਸੰਸਥਾ ਦੇ ਮੈਂਬਰ ਮਾਸਟਰ ਹਰਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਨੇ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਸੰਸਥਾ ਦੇ ਚੇਅਰਮੈਨ ਸਵਰਨਜੀਤ ਸਿੰਘ ਦੀ ਅਗਵਾਈ ਦੀ ਹੇਠ ਇਹ ਸੰਸਥਾ ਲੋਕ ਭਲਾਈ ਦੇ ਕੰਮਾਂ ਚ ਵੱਧ ਚੜ੍ਹ ਕੇ ਹਿੱਸਾ ਲੈਂਦੀ ਹੈ ਹੈ ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਰਮਨਦੀਪ ਕੌਰ ਡਾਕਟਰੀ ਦੀ ਪੜ੍ਹਾਈ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਪੜ੍ਹਾਈ ਦੀ ਜ਼ਿੰਮੇਵਾਰੀ ਸੰਸਥਾ ਨੇ ਲੈ ਲਈ ਹੈ ਸੰਸਥਾ ਵੱਲੋਂ ਪਿੰਡ ਮਾਧੋਪੁਰ ਦੀ ਬਹੁਤ ਹੀ ਜ਼ਰੂਰਤਮੰਦ ਗੁਰਪ੍ਰੀਤ ਕੌਰ ਦੇ ਮਕਾਨ ਦੀ ਦੀ ਖਸਤਾ ਹਾਲਤ ਨੂੰ ਦੇਖਦੇ ਹੋਏ ੫੦ ਹਜ਼ਾਰ ਰੁਪਏ ਦੀ ਮਦਦ ਵੀ ਦਿੱਤੀ ਗਈ ਇਸ ਮੌਕੇ ਬੇਅੰਤ ਸਿੰਘ, ਸਵੀਰਾ, ਸੱਤਪਾਲ ਸਿੰਘ, ਸੋਨਿਕਾ ਰਾਣੀ ਅਤੇ ਸੰਸਥਾ ਦੇ ਹੋਰ ਮੈਂਬਰ ਹਾਜ਼ਰ ਸਨ।

  • पायलट पिता ने नापी आसमान की ऊंचाई, बेटा चलने-फिरने में लाचार

    पायलट पिता ने नापी आसमान की ऊंचाई, बेटा चलने-फिरने में लाचार

    आसमान की ऊंचाइयों से बातें करने वाले पायलट का बेटा जिंदगी की जंग लड़ रहा है। महज 30 साल की उम्र
    में रीढ़ की हड्डी में चोट के कारण वह चलने फिरने से लाचार है। फिलहाल ‘सर्व ह्यूमैनिटी सर्व गॉड’ संस्था उसका इलाज करा रही है। अभिषेक को उम्मीद है कि जल्द व फिर पहले की तरह दौड़ेंगे।

    पीजीआई के पास गांव रतवाड़ा में सर्व ह्यूमैनिटी सर्व गॉड संस्था के केंद्र में उपचाराधीन अभिषेक जीरकपुर में रहते हैं। अपनी मर्जी से हिलने में भी वह सक्षम नहीं हैं। अभिषेक ने बताया कि 2011 में मां चल बसीं जबकि लगभग एक साल पहले पिता । इसके बाद से मुसीबतों का पहाड़ उन पर टूट पड़ा। छोटा भाई अमित मानसिक बीमारी से जूझ रहा है। वह जीएमसीएच-32 में भर्ती है। अभिषेक ने बताया कि लगभग एक महीने पहले उनका रक्तचाप अचानक बड़ी तेजी से बढ़ा। अस्पताल ले जाना पड़ा। वहां पता चला कि उनके शरीर का गर्दन से नीचे का हिस्सा सुन्न हो चुका है। रीढ़ की हड्डी में किसी खराबी के कारण यह समस्या हुई। अभिषेक ने बताया कि जीएमसीएच-32 में न्यूरो विभाग न होने के कारण उन्हें भर्ती नहीं किया गया। मैक्स गए तो वहां जगह नहीं मिली। पीजीआई में 20 दिन रहने के बाद उन्हें गुरुद्वारे के सहयोग से एक सप्ताह पहले ‘सर्व ह्यूमैनिटी सर्व गॉड’ संस्था में भेज दिया गया। 13 दिसंबर को जीएमसीएच-32 में एक और मरीज मिला था, जिसे संस्था लाई है।

    अभिषेक ने बताया कि पिता आइवर पर्सीवल अलेक्जेंडर एयर कमोडोर थे। 3 जनवरी 1994 को वायु सेना स्टेशन चंडीगढ़ का एयर ऑफिसर कमांडिंग नियुक्त किया गया था। उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल से भी नवाजा गया था। 80 के दशक में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का प्लेन तक उड़ाया था। मता अलमोड़ा की रहने वाली थीं और एक प्रसिद्ध ज्योतिषी थीं। हरियाणा के पूर्व सीएम भजनलाल और पंजाब के पूर्व सीएम अमरिंदर तक उनसे भविष्य जानने पहुंचते थे।

    संस्था के संस्थापक स्वर्णजीत सिंह ने बताया कि उनके पास दो केंद्र हैं। एक पैंथपुर गांव में दूसरा रतवाड़ा में पैंथपुर निवासी हरिंदर सिंह गुरु ने अपना घर संस्था क मरीजों के लिए दिया तो रतवाड़ा की सिद्धू फैमिली ने नेक काम के लिए अपना आसरा दिया। दोनों में कुल 30 मरीज इलाजरत हैं। 202 मरीज यहां से इलाज करवाकर अपने-अपने घर जा चुके हैं। सुबह फिजियोथैरेपिस्ट का सेशन होता है।

    फिजियोथैरेपिस्ट मैथ्यू का कहना है कि एमआरआई की रिपोर्ट में सामने आया है कि इनकी नाड़ियां दब गई हैं। यह कई कारण से होता है। कई बार गिरने से या ट्रॉमा की वजह से भी हो जाता है। एक्सरसाइज शुरू करवाई है। यह लाइलाज बीमारी है, लेकि मरीज का ठीक होना उसकी इच्छाशक्ति और एक्सरसाइज पर भी निर्भर होता है

  • हर तरफ से हारे तन-मन को उम्मीद के पंख देते चंद लोग और उनकी संस्था

    हर तरफ से हारे तन-मन को उम्मीद के पंख देते चंद लोग और उनकी संस्था

    वर्ष 2017 में भाई की शादी का कार्ड देने के लिए घर से निकले आसिफ अली खान उस दिन आखिरी बार अपने बूते चले। 11वीं में पढ़ने वाले आसिफ के सपनों को पीछे से आ रही कार ने | ऐसा रौंदा कि जिंदगीभर के लिए किसी के सहारे रहने को मजबूर हो गए। रीढ़ की हड्डी में चोट के चलते आसिफ के शरीर का निचला हिस्सा | बिलकुल काम नहीं करता। उन्हें वहां से दिल्ली के लिए भेज दिया गया। पेशे से दर्जी पिता के लिए आसिफ का इलाज और घर का खर्च दोनों उठाना मुश्किल हो रहा था। हार कर परिवार वालों ने आसिफ को ऐसे ही छोड़ दिया। जीवन से उम्मीद खेड़ अकेले एक कमरे में जीवन बिता रहे आसिफ के काम वह शख्स आया जो न उनके परिवार से था और न ही उनके धर्म का। पढ़ाई के दौरान एक जगह मोटरसाइकिल का काम सीख रहे आसिफ की दोस्ती लक्खन कश्यप से हुई। हादसे के बाद बिस्तर तक सीमित उनकीदुनिया को लक्खन ने यह दिखाई। उन्होंने न केवल आसिफ की वीडियो बनाकर मदद की गुहार लगाई बल्कि जबतक सहायता न मिली तबतक खुद अपनी दोस्त की सेवा की उसी वीडियो के सहारे सर्व ह्युमेनिटी सर्व गॉड (एसजीएसएच) की टीम आसिफ को लेने हाथरस (उत्तर प्रदेश) पहुंच गई और यहां पंजाब के खरड़ स्थित रतवाड़ा ले आए।

    यहां आसिफ का ध्यान रखने वाले सोनू सिंह नैन कहते है, ‘सबसे बड़ा धर्म इंसानियत का होता है हमारे लिए यहां हर व्यक्ति समान है। हमें इस से फर्क नहीं पड़ता कि कौन किसके आगे सिर झुका रहा है। भगवान तो मन इच होंदा ए… ‘ आसिफ की हालत में अब सुधार नजर आ रहा है मजबूर लोगों की इस शरणस्थली में रियास जनसत्ता एम और उनकी पत्नी सानी एक महीने पहले रियाज के इलाज के लिए यहां आए है। वर्ष 2003 में एक बाइक हादसे में रियाज की रीढ़ की हड्डी में चोट लगने के कारण उनका निचला शरीर काम नहीं करता। सोशल मीडिया के जरिये जैसे ही उन्हें एसजीएसएच का पता चला तो उन्होंने तुरंत इनसे संपर्क कर यहां पहुंचे कोने में जुहर की नमाज अता कर रही रियाज की पत्नी सानी भाषा बाधा के चलते कुछ कह तो नहीं पाई लेकिन उनकी नम आंखें और होंठो पे मुस्कुराहट उस उम्मीद को दर्शाती है जो यहां उन्हें इन लोगों को बीच मिल रही है। इसी बीच रियाज की पट्टी बदलने स्वयंसेवक ज्योति केवलानी वहां पहुंची और उन्होंने बताया, ‘हम सब यहां एक दुसरे की मदद करते है। यह हम सबका एक छोटा सा परिवार है बाहर क्या हो रहा है हमें उससे कोई मतलब नहीं है। यहीं हमारी दुनिया है।’

    ओड़ीशा से यहां आई 23 वर्षीय लीलीमा बैदई सकारात्मक ऊर्जा का अथाह स्त्रोत है। उसके शरीर का निचला हिस्सा काम नहीं करता, पर लीलीमा के पास इसका दुख मनाने के बजाय हजार खुशी के कारण है। पेट के बल लेटे-लेटे वह अपना पूरा दिन बुनाई में बिताती है। ‘ये देखो गुड़िया. यह मैंने बनाई है। यह जो कैप है न यह मैंने अपने लिए बनाई है… ऐसा ही एक मैं आपके लिए भी बना दूंगी। और दिखाऊं… यह बच्चों के मोजे, छोटे-छोटे फ्रॉक, सब क्रोशिया से बनाया है।’ वह 18 साल से बिस्तर पर है। हालांकि, उसके पूरे तरह ठीक होने के आसार बहुत कम है लेकिन फिर भी उन्हें बिस्तर से व्हीलचेयर पर लाने के लिए एसजीएसएच की पूरी टीम लगी हुई है। लीलीमा पिछले कल पहली बार व्हीलचेयर पर बैठी।


    बकौल एसजीएसएच के संस्थापक स्वर्णजीत, ‘इस संस्थान में आना वाला शख्स हिंदू हो या मुसलमान, चाहे वह ईसा मसीह को माने या फिर गुरुग्रंथ साहिब के आगे मत्था टेके, इससे यहां किसी को फर्क नहीं पड़ता। ईश्वर का स्मरण करते हमें हर शख्स में उसकी परछाई दिखाई देती है नफरत, मनमुटाव का मौका ही नहीं मिलता। यह भारत है… यहां हमेशा से सांप्रदायिक सद्भावना वाला माहौल रहा है एक दूसरे की मदद करना हमारे खून में है।’

  • ਧਾਮੀ, ਐਡਵੋਕੇਟ ਮੋਹਿਤ ਪੂਰੀ, ਰਜਨੀਸ਼ ਭਾਰਦਵਾਜ, ਐਡਵੋਕੇਟ ਅਜੇ ਤੇ ਵਿਮੌਜੂਦ ਸਨ।

    ਧਾਮੀ, ਐਡਵੋਕੇਟ ਮੋਹਿਤ ਪੂਰੀ, ਰਜਨੀਸ਼ ਭਾਰਦਵਾਜ, ਐਡਵੋਕੇਟ ਅਜੇ ਤੇ ਵਿਮੌਜੂਦ ਸਨ।

    ਤਸਵੀਰ: ਕੇਵਲ ਸਿੰਘ ਅਮਲੋਹ ਸਰਕਾਰੀ ਮਿਡਲ ਸਕੂਲ ਸਿੱਧਵਾਂ ਵਿਖੇ ਸਰਬ ਹਿਊਮਨਿਟੀ ਸਰਵਗੋਡ ਚੈਰੀਟੇਬਲ ਟਰੱਸਟ ਖਰੜ ਵਲੋਂ ਵਿਦਿਆਰਥੀਆਂ ਨੂੰ ਸਟੇਸ਼ਨਰੀ, ਵਰਦੀਆਂ ਤੇ ਹੋਰ ਸਮਾਨ ਭੇਟ ਕੀਤਾ ਗਿਆ। ਇਸ ਮੌਕੇ ਇੰਚਾਰਜ ਮਨਮੋਹਨ ਥਾਪਰ, ਬੇਅੰਤ ਸਿੰਘ ਟਰੱਸਟ ਵਲੋਂ ਮਾਨਵਤਾ ਦੀ ਭਲਾਈ ਲਈ ਕੀਤੇ ਜਾ ਰਹੇ ਕਾਰਜਾਂ ਦੀ ਪ੍ਰਸੰਸਾ ਕੀਤੀ। ਇਸ ਮੌਕੇ ਟੀਮ ਦੇ ਮੈਂਬਰ ਦੀਪਿਕਾ ਤੇ ਸਵਰਨਜੀਤ ਸਿੰਘ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਸੰਸਥਾ ਵਲੋਂ ਸਿੱਧਵਾਂ, ਅਲੀਪੁਰ, ਮਾਜਰੀ ਸੋਢੀਆਂ ਵਿਖੇ ਬੱਚਿਆਂ ਨੂੰ ਸਟੇਸ਼ਨਰੀ, ਬੂਟ, ਜੁਰਾਬਾਂ ਵੰਡੀਆਂ ਗਈਆਂ ਹਨ। ਵੇਰਵਾ ਬਲਜਿੰਦਰ ਸਿੰਘ/ਤਸਵੀਰ: ਕਰਨ